उदिता दुहन हैंडबॉल छोड हॉकी स्टिक उठाई, कोच ने की छुट्टी पर उदिता को मिला मौका, पिता की मृत्यु माँ के हौसले ने बनाया खिलाड़ी
आइए आज बात करते हैं, 26 साल की युवा खिलाड़ी, हरियाणा के हिसार जिले के छोटे से गांव की रहने वाली जो कि अब भारत की सीनियर हॉकी खिलाड़ी हैं, उदिता दुहन के बारे में। कैसे वह खेल प्रति प्रेरित हुई। जसवीर सिंह, उदिता के पिता जी हैं। जो पुलिस अधिकारी होने के साथ-साथ एक हैंडबॉल खिलाड़ी भी थे। शायद इसी बजह से वो हैंडबॉल/ खेल के प्रति प्रेरित हुई। उन्होंने ने कहा, ऐसे बड़े इवेंट में सबसे महंगा प्लेयर होना मेरे लिए बेहद गर्व की बात है। बहुत अच्छा लगता है जब आपकी मेहनत को पहचान मिलती है, लेकिन उसके साथ बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी भी आती है; मुझे उसका एहसास है। टीम ने मुझपर भरोसा दिखाया है, और मैं इस विश्वास को कायम रखने के लिए अपना 100% देना चाहती हूँ।
हैंडबॉल से हॉकी तक का सफर :
उदिता अपने पिता से प्ररित होकर हैंडबॉल खेला करती थी। बताती हैं जब वह लगभग 10 साल की थी तब उनके के हैंडबॉल के कोच 3 दिनों तक स्कूल नहीं आए। तब उन्होंने पास के मैदान पर हॉकी खेलते खिलाड़ियों को देखा, उन्होंने इस बारे में अपनी मां गीता देवी से बात की और कहा कि मैं हॉकी खेलना चाहती हूं। उनकी मां ने हॉकी कोच से बात की, उदिता को दौडते हुए देखकर कोच बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने उदिता को हॉकी स्टिक थमा दी। उनके पिता ने भी उन्हें प्ररित किया कि वह कोई भी खेल खेले, उसे पूरी शिद्दत के साथ खेले, उसमें कोई भी कामचोरी ना हो। फिर क्या उदिता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।निजी संघर्ष और करियर पर प्रभाव:
उदिता दुहन के पिता का निधन 2015 में हो गया। यह उनके जीवन में बहुत बड़ा झटका था। इस मुश्किल समय में पिता के बाद उनकी माँ ने उन्हें सम्भाला और उनका सहारा बनी।उदिता ने इस सदमे के बाद हॉकी को और ज्यादा गंभीरता से लिया। उन्होंने ने बताया कि पिता की मौत के बाद 2016 में हॉकी खेलना उनके लिए एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बन गया था। इसके बाद मां के प्रोत्साहन से उन्होंने SAI हास्टल में प्रशिक्षण लिया और एक साल बाद 2017 में सीनियर राष्ट्रीय टीम में डेब्यू किया।
करियर, उपलब्धियां और उतार-चढ़ाव:
उदिता दुहन भारतीय हॉकी टीम की एक प्रमुख खिलाड़ी हैं। जो टीम में मुख्य रूप से डिफेंडर के रूप मे खेलती है और पेनाल्टी कॉर्नर स्पेशलिस्ट के रूप में उभरी हैं। पेनाल्टी कॉर्नर के मौके को भुनाने में माहिर इस खिलाड़ी को पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है। ऐसा बहुत न के बराबर होता है कि वह इस मौके को भुना न पाये या गोल में परिवर्तित न कर पाएं।- वह उस भारतीय टीम का हिस्सा रहीं, जो टोक्यो ओलंपिक 2020 में चौथे स्थान पर रही।
- एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2023 में टीम ने स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीता।
- राष्ट्रमंडल खेल (Commonwealth Games) 2022 में टीम ने कांस्य पदक (Bronze) जीता।
- FIH नेशन्स कप 2022 में स्वर्ण पदक (Gold) जीता।
- एशियन खेल (Asian Games) 2018 की टीम का हिस्सा रहीं, जिसने रजत पदक (Sliver) जीता।
- पद परिवर्तन: करियर की शुरुआत और शुरू से ही फॉरवर्ड प्लेयर के रूप में खेलने वाली उदिता ने खुद को एक सफल डिफेंडर के रूप में ढाल लिया, और राष्ट्रीय टीम में जगह पक्की की।
- पेनल्टी कॉर्नर स्पेशलिस्ट: जब गुरजीत कौर और दीप ग्रेस एक्का टीम में नहीं होते, तब उदिता को डिफेंडर के रूप में खिलाया जाता। वह इस का फायदा अच्छी तरह से उठाती और इस प्रकार वह पेनल्टी कॉर्नर स्कोरिंग के विकल्प में उभरी और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा है।
- अंतरराष्ट्रीय डेब्यू: उन्होंने 2017 में अंतरराष्ट्रीय कैप पहनी यानी कि उनका सीनियर भारतीय हॉकी टीम में डेब्यू हुआ। तब से उन्होंने 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।
महिला हॉकी लीग और रिकॉर्ड नीलामी:
महिला हॉकी इंडिया लीग (HIL) 2024-25 का यह पहला सीजन/ संस्करण है। जो पुरुष हॉकी इंडिया लीग (HIL) के साथ आयोजित होगी। जिसमें चार टीमें प्रतिभाग कर रहीं है।उदिता दुहन महिला HIL की सबसे महंगी खिलाड़ी रहीं। उन्हें ₹32 लाख रुपये में बंगाल टाइगर्स (Bengal Tigers) टीम ने खरीदा।
उनके बाद अन्य खिलाड़ी भी नीलामी में महंगे रहे, नीदरलैंड की यिब्बी जैनसन (₹29 लाख) और भारत की लालरेमसियामि (₹25 लाख) रुपये को खरीदा गया। यह नीलामी में इसलिए खास रहीं क्योंकि लीग में प्रतिभाग कर रहीं चार टीमों बंगाल टाइगर्स (Bengal Tigers), ओडिशा वारियर्स (Odisha Warriors), सूरमा हॉकी क्लब (Soorma Hockey Club)और दिल्ली एसजी पिपर्स (Delhi SG Pipers) के पास नीलामी के लिए बस दो-दो करोड़ रुपये थे।
उदिता दुहन की कहानी दर्शाती/ बताती है कि कैसे एक विकल्प, दृढ़ संकल्प, मेहनत और संघर्ष एक खिलाड़ी को शीर्ष पर ले जा सकता है। यह बात सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं है ब्लकि उन सभी के लिए है जो अपने सपने को पूरा करना चाहते हैं। इसी कारण उदिता को इस लीग में इतनी बड़ी पहचान मिली और एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरी।
उनके बाद अन्य खिलाड़ी भी नीलामी में महंगे रहे, नीदरलैंड की यिब्बी जैनसन (₹29 लाख) और भारत की लालरेमसियामि (₹25 लाख) रुपये को खरीदा गया। यह नीलामी में इसलिए खास रहीं क्योंकि लीग में प्रतिभाग कर रहीं चार टीमों बंगाल टाइगर्स (Bengal Tigers), ओडिशा वारियर्स (Odisha Warriors), सूरमा हॉकी क्लब (Soorma Hockey Club)और दिल्ली एसजी पिपर्स (Delhi SG Pipers) के पास नीलामी के लिए बस दो-दो करोड़ रुपये थे।
उदिता दुहन की कहानी दर्शाती/ बताती है कि कैसे एक विकल्प, दृढ़ संकल्प, मेहनत और संघर्ष एक खिलाड़ी को शीर्ष पर ले जा सकता है। यह बात सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं है ब्लकि उन सभी के लिए है जो अपने सपने को पूरा करना चाहते हैं। इसी कारण उदिता को इस लीग में इतनी बड़ी पहचान मिली और एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरी।
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